अब स्मर्च रॉकेट भारत में बनेंगे व ऊँची उड़ान भरेंगें

स्मर्च रॉकेट बनाने के लिए संयुक्त उपक्रम के सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की तरह सफल होने की आशा है।

एक प्रमुख प्रतिरक्षा समझौते द्वारा, भारत और रूस भारतीय फैक्टरियों में 80 किमी. रेंज वाले स्मर्च रॉकेट बनाने पर सहमत हुए हैं। यह जानकारी हाल ही में भारतीय प्रतिरक्षा मंत्रालय ने दी। एक अधिकारी ने कहा, ‘रूस से तकनीक हस्तांतरण द्वारा स्मर्च रॉकेटों के पांच वर्जन बनाने हेतु ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) ने रूस के रोजबोरोनएक्सपोर्ट तथा स्पलाव ‘स्पा’ से एमओयू साइन किया है। 70-80 किमी. रेंज में स्मर्च रॉकेट तकनीकी लिहाज से उत्कृष्ट हैं। स्मर्च रॉकेटों की तकनीक स्वदेशीकृत करके ओएफबी, उन्नत रॉकेट प्रणाली निर्माण में नई ऊंचाईयां छुएगा।’


स्मर्च मिसाइल के स्थानीय उत्पादन पर रूस व भारत में वार्ता हुई है। पत्र के अनुसार, ओएफबी अम्बाझरी निर्माण एजेंसी होगा। ओएफबी अम्बाझरी,पिनाका-मल्टी-बैरेल रॉकेट लांचर्स (एमबीआरएल) रॉकेटों का भी बड़ा भाग बनाता है और 155मिमी. 39कैलिबर बोफोर्स ऑर्टिलरी होवित्जर्स के स्थानीय उत्पादन में भी लगा है। रूसी विमानन तकनीक के लाइसेंस-आधारित उत्पादन हेतु संभावित सहयोग पर भी दोनों पक्षों में चर्चा हुई। भारत हेतु रूस दशकों से अस्त्र-शस्त्रों का विशालतम आपूर्तिकर्ता रहा है। इस सहयोग से भारत भी लाभान्वित होगा क्योंकि रूस-विकसित तकनीकी हासिल करके भारत को वह ज्ञान और अनुभव मिलेगा जो अन्य देशों को दशकों में मिलता है।’


विश्व आयुध व्यापार विश्लेषण केंद्र का अनुमान है कि 2012 में रूस भारत को 7.7 बिलियन डॉलर के हथियार देगा, जो रूसी सैन्य निर्यात का लगभग 60 फीसदी और भारतीय आयात का 80 फीसदी होगा। भारतीय नौसेना हेतु दिसम्बर में निर्धारित आईएनएस विक्रमादित्य विमानवाहक पोत का हस्तांतरण, 2.34 बिलियन डॉलर की ऐतिहासिक महंगी परियोजना है। परियोजना 11350.6 के अंतर्गत लगभग 1 बिलियन डॉलर की दो फ्रिगेट का हस्तांतरण, दूसरी सबसे बड़ी डिलीवरी होगी।जनवरी 2012 में भारतीय नौसेना को परियोजना 971 नेरपा आण्विक पनडुब्बी की लीज, इस साल का तीसरा सबसे बड़ा हस्तांतरण होगा, भारत के लिए जिसकी लागत लगभग 920 मिलियन होगी।


रोजबोरोनएक्सपोर्ट के महानिदेशक अनातोली इसाइकिन ने वेदोमोस्ती को बताया कि रूस ने 2012 में आयुध आपूर्ति के 5 बिलियन डॉलर के करार किए हैं। स्मर्च रॉकेट बनाने के लिए भारत से करार, इनमें सबसे बड़ा है।
भारतीय प्रतिरक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘70-80 किमी. रेंज में स्मर्च रॉकेट तकनीकी उत्कृष्ट हैं। स्मर्च रॉकेट तकनीक स्वदेशीकृत करके ओएफबी, उन्नत रॉकेट प्रणाली निर्माण में नई ऊंचाईयां प्राप्त करेगा।’ छह वर्ष पूर्व निर्माण समय से स्मर्च रॉकेटों की दो रेजिमेंट भारतीय सेना में सेवारत रही हैं। स्मर्च मिसाइल के स्थानीय उत्पादन पर रूस व भारत में वार्ता हुई है, और यह माना जाता है कि ओएफबी अम्बाझरी निर्माण एजेंसी होगा। भारत हेतु रूस दशकों से अस्त्र-शस्त्रों का विशालतम आपूर्तिकर्ता रहा है।
रूस के अनुसार वे उच्च-तकनीकी उत्पाद विकसित करने वाले हैं इसलिए भारत से सैन्य और तकनीकी सहयोग बहुत महत्त्वपूर्ण है।

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