करी हो या क्रिकेट, मॉस्को में भारत सदाबहार

भारतीय दूतावास मॉस्को के ऐतिहासिक क्षेत्र में 19वीं सदी की एक खूबसूरत इमारत में अवस्थित है।

भारतीय दूतावास मॉस्को के ऐतिहासिक क्षेत्र में 19वीं सदी की एक खूबसूरत इमारत में अवस्थित है।

दुकानों में, रेस्तरां में तथा गलियों मेंं भारतीय इस बात का ख्याल रखते हैं कि वे अपनी संस्कृति को साथ लेकर चलें।

विदेशों की दुकानों में, रेस्तरां में, गलियों में तथा किलों में ऐसी कई जगह हैं, जो भारतीय तथा भारतीय मूल के लोगों में सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर भावनात्मक लगाव पैदा करती है। मॉस्को में भारतीय गतिविधियों की ऐतिहासिक पहचान 1911 में बना भारतीय दूतावास है। मॉस्को के भारतीय दूतावास में राष्ट्रीय छुट्टियाँ और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम धूमधाम से मनाए जाते हैं।


किस्टोप्रंडी बुलेवर्ड या म्यानित्सकाया की गलियाँ, इमारतें रूसी इतिहास के विभिन्न दौर की याद दिलाती हैं। जोकि15वीं सदी में आन्द्रो निकोव मोनेस्ट्री के अधिकार में रही। 1812 में लगी आग के दौरान यह इलाका किसी चमत्कार की तरह बच गया, जिसमें पूरा शहर जल कर राख हो गया था, लेकिन पुराने मॉस्को का पैट्रिआर्कल ढांचा बरकरार रहा। विभिन्नसांस्कृतिक पृष्ठभूमि के भार‌तियों को एक साथ लाती हैं और उनके बीच भावनात्मक खिंचाव पैदा करती हैं। मॉस्को में भारतीय गतिविधियों का गढ़ है, 1911 में जाने-माने रूसी आर्किटेक्टा इवान बर्यूटिन द्वारा बनाई गईa एेतिहासिक इमारत, इंडियन एंबैसीे। यह वॉरोंत्सोावो पोल स्ट्रीट में है, शुरुआती दौर में जो 14वीं सदी में कभी वॉरोंत्सो व प्रिंसेस के शाही परिवार का निवास हुआ करती थी और फिर 15वीं सदी में आन्द्रो निकोव मोनेस्ट्री के अधिकार में रही।


मॉस्को में ऐसी कई जगहें हैं, जिन्हें भारतीय और रशियन के द्वारा पारंपरिक रूप से भारतीय माना जाता है। इनमें से एक है, लैनिन्सकी प्रॉस्‍पैक्‍ट स्ट्रीट में गुबकिन इंसि्टट्यूट का कल्चरल सेंटर, जो किसी ज़माने में गुबकिन स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑयन एंड गैस का म्यूज़ियम ऑफ़ हिस्ट्र हुआ करता था। रशियन पीपल्स फ्रैंडशिप यूनिवर्सिटी में मौजूद इंटर क्लब कॉन्फ्रैंस हॉल, ऐसी ही दूसरी जगह है। PFUR मॉस्को में रहने वाले विभिन्न समुदायों के लोगों का तहे दिल से स्वागत करता है, लेकिन खासतौर पर भारतियों के लिए यह ‘घर से दूर, घर’ का प्रतीक है। होली और दीवाली पर भारतीय मूल के लोग सज-धज कर अपने परिवारों के साथ इन जगहों पर रंगों और रोशनी के इन त्योहारों को धूमधाम से मनाते हैं। यह बात असत्य है कि भारतीय लोगों से मेल-मिलाप के लिए त्योहारों का इंतज़ार करते हैं।


मॉस्को में कई ऐसे भारतीय रेस्तरांत हैं, जहाँ पर ये लोग गरमागरम मसाला चाय या फिर कुछ न कुछ खाने के लिए बार-बार मिलते रहते हैं। ‘’टॉक ऑफ़ दि टाउन’’, ‘’महाराजा’’, खजुराहो’’, दरबार’’ उन गिने-चुने रेस्तरांत में से हैं, जहाँ मॉस्को में रहने वाले भारतीय उस खाने का और माहौला का लुत्फ उठाते हैं, जिनकी उन्हें आदत है।


भारतीय दूतावास के मुताबिक रूस में करीब 14 हज़ार ‍हिंदुस्तानी हैं, जिनमें से करीब आधे मॉस्को में ही रहते हैं। रूस में करीब 4 हज़ार भारतीय छात्र, विभिन्न प्रकार के मेडिकल और टेक्नीकल इंसि्टट्यूट में पढ़ रहे हैं।


किसी भी हिंदुस्तानी के लिए अपने देश या अपनी पसं‍द के स्वाद की याद आना लाज़मी है या कोई रूसी जो स्वादिष्ट हिंदुस्तानी पकवानों, सुं‍दर गहनों और दुपट्टों का शौक रखता हो, उन लोगों के लिए मॉस्को में ऐसे कई बाज़ार हैं, जहाँ उचित दाम पर सामान मिलते हैं, जैसे स्रीटेन्का स्ट्रीट में मसालों की दुकान, व्हाइट क्लाउड्स एसोटेरिक सेंटर, पोकरोव्का स्ट्रीट की दुकानें और सेवास्तोपोल होटेल की इंडियन मार्केट आदि।


मॉस्को स्ट्रीट यूनिवर्सिटी का स्टेडियम, जहाँ आठ टीमों के बीच क्रिकेट मैच का आयोजन होता है, वहाँ पर हिं‍दुस्तानियों का जुनून इस खेल के लिए देखने लायक होता है। जिन लोगों को मॉस्को में भारतीय संस्कृति के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता है, भारत को वहाँ की गलियों में चलते-फिरते देख सकते हैं। ज्यादातर लोग अपनी गाड़ियों या पब्लिक ट्रांस‍पोर्ट से ऐसे लैंड मार्क और जगहों से गुज़रते हैं, जिनका नाम हमारे देश के बड़े नेताओं या शख्सियतों के नाम पर है।

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